हिंदी सौरभ ।

१. प्रसन्नता स्वास्थ्य देती है ,विषाद रोग देते हैं ।
२. मुस्कान प्रेम की भाषा है ।
३. प्रकृति को ,भगवान को ,मनुष्य मन को एडमित्थम
कहा नहीं जा सकता ।
४. जहाँ प्रेम वहाँ क्षेम , जहाँ प्यार वहाँ त्योहार ।
५. प्रकृति संरक्षण भगवान की आराधना ही है ।
६. प्रकृति का सब काम धीरे धीरे होते हैं ।
७. उपदेश देना सरल है । उपाय बताना कठिन है ।
८.बहुमत की आवाज़ न्याय का द्योतक नहीं है ।
९ जैसा अन्न वैसा मन ।
१०. किसी भी काम में हाथ ढालने से पूर्व उसके
अच्छे या बुरे फल पर विचार कर लेना चाहिए ।
११. प्रचंड वायु में भी पहाड़ विचलित नहीं होते ।
१२.एक झूठ को छिपाने के लिए दस झूठ बोलने पड़ते हैं ।
१३. वही सब से तेज़ चलता है , जो अकेला चलता है ।
१४. परवाह नहीं चाहे ज़माना कितना भी खिलाफ हो
चलूँगा उसी राह पर जो सीधी और साफ़ हो ।
१५. अल्प ज्ञान खातरनाक होता है ।
मूल :संग्रह ।

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