हिंदी सौरभ |

अध्यात्म चिंतन |

मृत्यु और अमृत इस शारीर में ही हैं|

मनुष्य मोह से मृत्यु को और सत्य से

अमृत को प्राप्त कर लेता है|

_वेद व्यास.

भगवान् ने संसार को बनाया है शारीर

के उपयोग के लिए , उपभोग के लिए नहीं |

भगवान् सत्य है , नित्य है |

संसार सत्य है, अनित्य है |

_कृपालू महाराज .

उदारता अधिक देने में नहीं है, समझदारी

के साथ देने में है|

जहाँ चाह है , वहाँ राह भी है |

हँसना मना है|

मैं ने चाँद से पूछा ,”देखा है कहीं मेरे

यार सा हसीन?”

चाँद ने कहा, ”साले, इतनी ऊपर से

दिखता है क्या?”

मेरा सवाल-

पत्नी के भायी को ”साला” कह कर हम

उसका हंसीं उड़ाते हैं, लेकिन पति

के भायी को इज्ज़त से ”देवर” कहते हैं|

ऐसा क्यों ?

मूल:संग्रह

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