हिंदी सौरभ |

अध्यात्म चिंतन
१)जाती पाति कुछ नहीं कोई |
हरि को भजे सो हरि का होई |
-कबीर
हिंदी फिल्मों से चुने साहित्य |
१)इनसान  के हैं कई रूप यहाँ |
२)ताकत से नहीं, क़दमों से नहीं |
मोहब्बत से चलती हैं यह दुनियाँ |
३)अँधेरे में साया भी हमारा साथ छोड़ता है |
४)सपनें हकीकत की चट्टानों से टकरा
कर टूट जातें हैं |
५)ऐसा तो आदमी life में दो time
भागता है| Olympic का race हो या
police का case हो | तुम किसलिए
भागता है भाई ?
चिंतन-मंथन |
1)प्यार  करने की और दिखाने की भी
चीज़ होती है| दिखाने से प्यार और
भी बढ़ जाता है |
2)लोग कहतें हैं -”समय  चला जाता है”
लेकिन असलियत में हम चले जातें हैं ,
समय रह जाता है |
3)सितारों से आगे जहान और भी है |
4)ऐ बेवफ़ा ज़िंदगी, तेरे मासूम चेहरा
भूलने के काबिल नहीं है |
5)राम राम जपना, पराया माल अपना |
6)यह दुनिया है भ्रष्ट- भ्रष्ट |
जीवन में हैं कष्ट-कष्ट |
7)नारी पहले चन्द्रमुखी लगती है, बाद में
सूरजमुखी और आखिर में ज्वालामुखी |
मूल: संग्रह.
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