हिंदी सौरभ |

१)प्रकृति है भगवान की चमत्कृति ,
प्रण करें  न हो उसकी विकृति |
२)मजहब ( religion ) नहीं सिखाता
आपस में बैर रखना |–Iqbal .
३)एको देवो देवकीपुत्र एव |
एकं शास्त्र भगवद गीतम |
एको मन्त्रस्तस्य नामानि |
कर्माप्येकम  तस्य देवस्य सेवा |
(एक ही धर्म शास्त्र गीता है |
एक ही भगवान् कृष्ण है|
एक ही मन्त्र उसका नाम है |
एक ही कर्म  उसकी सेवा है|)
सभी मानव ईश्वर की संतान है |
मनुष्य की केवल दो जाति–असुर
एव च  देवो |
जिसके ह्रदय में दैवी संपत्ति कार्य
करती है, वह देवता है| तथा जिसके
ह्रदय में आसुरी संपत्ति कार्य करती
है, वह असुर है | तीसरी कोई अन्य
जाति सृष्टि में नहीं है|
ॐ– अक्षय परमात्मा का  नाम है
हर कामना ईश्वर से सुलभ |
मूल:संग्रह.
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