हिंदी सौरभ

चिंतन.
1)सच को सच  साबीत करने के लिए
कभी कभी झूठ का सहारा लेना पड़ता है |
2)मैं खुद ही एक   प्रशन हूँ, जो उत्तर की
खोज में भटक रहा हूँ |-धृतराष्ट्र .
3)सब तीर्थ बार बार , गंगा सागर एक बार|
4)बाघों में खिलें हैं , कैसे कैसे फुलवाँ |
बुलबुल क्यों नहीं गायें |
5)मैं  खुशबू   हूँ, बिखरने से  न रुके कोई ,
और बिखर जाए  तो मुझ को न समेटे कोई|
6)जीवन के हर पथ पर माली पुष्प
नहीं बिखरता है |
प्रगति का पथ अकसर पत्थरीला
ही होता है|
7)वृक्ष लगाओ–प्रदूषण भगाओ |
8)हमारा कुत्ता हमारी गली में शेर |
9)कर्तव्य भावना से महान है |
10)जीवन की डोर बड़ी कमज़ोर,
कौन जाने कब टूटे |
11)एक से भले दो|
12)अपने काम से नहीं, प्रभु के काम
से जियो|
13)अच्छा दोस्त और अच्छी पत्नी
किस्मतवालों को मिलतें हैं|
14)”शमा हर रंग में जलती है सहर
होने तक” |—घालिब.
मूल:संग्रह |
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s