हिंदी साहित्य सौरभ |

चिंतन|
१)ऊंची आवाज़ का सहारा वह ही लेता  है,
जिसके पास सच्छाई का सबूत नहीं  है|
२)जहाँ तेज़ है, वहाँ राज़ है|
जहाँ सफ़ेद है, वहाँ काला है|
जहाँ भगवान है, वहाँ शैतान भी है|
३)झूठी  माया , झूठी काया|
मत करो तू अभिमान|
झूठी तेरी शान रे बंधे |
कहावतें|
१)एक गाँव की बोली , एक गाँव की गाली |
२)अंधेर नगरी ,चौपट राजा|
३)हाथी की दाँत खाने को और, दिखाने
को और |
४)भगवान जब देता है,  छप्पड़ फाड़ कर
देता है|
५)भगवान के घर में देर है,अंधेर नहीं  है|
६)जिसका कोई नहीं, उसका भगवान होता है|
७)जितना पैसा उतना काम |
८)जान न पहचान , मैं तेरा मेहमान |
कविता |
१)समय बिताने के लिए करना है कुछ काम|
शुरू करो अंत्याक्षरी लेकर हरी का नाम|
२)एक दीप की लौ (flame)  मेरी कुटिया में जलती|
मेरे अन्दर के भावों के संग वह पलती |
३)मछुआ बैठा नदी किनारे|
घंटे भर से जाल बिछाए |
मछली उसकी चाल समझती |
दीखे तो, पर पास न आए|
४)अब  अपना घूंघट खोले |
कलिकाऍ झाँक रहीं हैं|
वसुधा पर मंद हँसी से|
सुन्दरता आँक(mark ) रहीं हैं|
५)वन में मयूर  अब नाचें |
हँस हँस आनंद मनाएँ|
उनकी छबि देख रहीं हैं|
नभ से  घन घोर घटाएँ|
मूल :संग्रह |
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