हिंदी साहित्य सौरभ|

१)कहावतें |
जब आये हो पत्थरों की बस्ती में
फ़िर आइनों का कारोबार मत करना |
खोधा पहाड़, निकला चूहा , वह भी मरा हुआ |
खुश रहो,खुश रख्खो |
प्यार प्यार से मिलता है, अधिकार से नही|
२)भगवान-परिकल्पना
भ(भूमि),  ग(गगन),  वा {(व+आ)=वायु ,अग्नि},
न (नीर) को परिभावित करता है, यह सब उस
सत्ता की पर्यायता के साक्षी है,जो इन सब का
आधार है|
चिंतन
१)हमें हालातों से लड़ना  चाहिए , इनसानों से नहीं |
२)हम शांतिके पुजारी हैं|
पर आवश्यकता पड़ने पर
धनुर्धारी हैं|–अटल बिहारि वाजपेयी|
कविता
काले मेघ,पानी बरसाओ|
बिजली की तलवार नही|
बूंदों के बाण चलाओ |
मूल:संग्रह.
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