हिंदी साहित्य सौरभ|

१)कविता
कभी फूल फेंकते हो| कभी पत्थर मारते हो|
मेरा दिल है नाजुक | क्यों इसे तोड़ देते हो?
कभी इकरार करते हो| कभी इनकार करते हो|
कभी मुस्कुराते हो| कभी रूट जाते हो|
मुझे खिलोना समझ कर क्यों टूटते हो?
२)कहावतें
पानी पीकर जाती पूछना|
गोद में बैठ कर दाढ़ी नोचना|
बाहर से सुन्दर, सड़ा हुआ अन्दर|
ईशवर ने बनायी जोड़ी| एक सीधा ,एक टेढ़ी|
चोरों की पाँव नहीं होती; झूठों की ज़बान
नहीं होती |
चूहा चले हाथी के चाल|
३)चिंतन
यदि आदमी सीखना चाहे, तो उसकी हर एक
भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है|–गांधीजी.
ज़िंदगी वह नहीं है, जो दिखाई देती है|
दीवाना हँसता है तो उसे हँसने दो यारों |
तन्हाई में तो  कंबख्त ने रोया भी तो होगा बहुत|
जान तो अनजान है, बड़ी बेईमान  है|
स्वार्थी का कोई साथी नहीं होता|
ज़िंदगी वैसे ही खाफ़ी छोटी है| उसको तुच्छ
और सस्ती बना कर और छोटा न बनाए |
प्यार शब्नम होता है, लेकिन वख्त आने
पर शोला बन जाता है|
इनसान इनसान से दूर भाग सकता है,
लेकिन भगवान् से नहीं|
४)प्रार्थना
हे जगत के स्वामी,अन्तर्यामी ,भेद  तो तेरे
कोई समझ न पाए |तेरी कृपा जो पाए वह
पावन हो जाए |
मूल :संग्रह .
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