चिंतन -मंथन|

१)जीना है तो ऐसे जियो ,बनके मिसाल  सब के लिए|
२)यह कैसे हो सकता है कि, कोई किसे  इतना प्यार करें ,
और बदले में उसे कुछ न मिलें|
३)सौ  चूहें खा कर बिल्ली हज़ गयी|
४)चींटी के पग  नूपुर बाजे, वह भी साहिब(खुदा )  सुनता है|
५)हालात और इनसान हर पल बदलते  रहतें हैं|
६)Tension  लेनेका  नही, देनेको है |
७)जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्नान |
मोल करो तलवार  का, पड़ा रहने दो म्यान |
८)रंग लाती है मेहंदी  सूख  जाने के बाद,
याद आती है दोस्ती, बिछड़  जाने के बाद|
९)भिरकता भ्रमर चाहता फूल रंगीन |
नाचता मोर चाहता मेघ रंगीन|
तड़पता चकोर  चाहता चंद्रमा हसीन|
हर एक चाहता पृकृति नव नवीन|
१०)विधाता  मानव को सुख  मानवता की परीक्षा के
लिए देता है तो,दुःख  शिक्षा के लिए  देता है|-रामायण.
मूल:संग्रह
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