चिंतन ओउर मंथन|

१)हर कश्ती की किस्मत  में  किनारा नहीं होता |
२)फूल और शूल में फ़र्क बस इतना है,
फूल खिलतें हैं  और मुरझा जातें हैं|
याद नहीं आतें|
शूल चुभतें हैं ,कसकतें हैं| और याद
आतें हैं|
३)सकल पदार्थ हैं  जग माँ ही|
कर्म हीन पर पावत नाहीं|
४)प्रेम कितना गहन और गहरा होता है,
उससे उत्पन्न निराशा या नफ़रत भी
उतना ही गहरी होती है|
मूल:संग्रह
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